My Poems

                                                                     एक आवाज़
भ्रष्टाचार की विभीषिका है या दावानल आया है,
पड़ी बेडिओं में भारतमां घायल उसकी काया है,
सभी तरफ से भू में नभ में घुप्प अँधेरा छाया है;
हमको वह भी नहीं सूझता हाथ अभी फैलाया है
अपने ही  बेटों ने उसके मान का मर्दन कर डाला
सांसे कैसे चल पायें जब ह्रदय विखंडन कर डाला.
उसको गिरवी रख आये वह स्विस बैंक के हांथों में
यहाँ  बनाया कालाधन और जमा कर दिया खातों में
लगती है सरकार हमारी भ्रष्टाचारियों का संगम,
पहले था बोफोर्स घोटाला अब है 2-G स्पेक्ट्रम,
इतना पैसा जो भारत में वापस फिर से आ जाये,
मिटे गरीबी और हर तरफ खुशहाली ही छा जाये 
माना है सुप्रीम कोर्ट जो एक न्याय का दरवाजा,
फिर भी क्यूँ बेफिक्र घुमते कलमाड़ी और ए. राजा ,
संविधान चीत्कार कर रहा संसद की गलियारों में,
सत्य पड़ा है एक कोने में झूठ  चल रहा कारों में


सर पे जो कश्मीर सुशोभित,वहां पर रक्त वह रहा है,
उसका कतरा-कतरा हमसे यह ही आज कह रहा है,
मैं भारत का एक अंग हूँ फिर ये कैसा चक्कर है,
अलग यहाँ क्यूँ संविधान क्यूँ लगी तीन सौ सत्तर है 
नहीं बोलता इस मुद्दे पर देश का कोई मिनिस्टर है,
अपराधी सारे हैं या फिर  शायद  सारे किन्नर हैं,
नेताओं की रगों में बहता शायद खून दोरंगा है,
लाला चौक पर नहीं फहरता  क्यूँ अब तलक तिरंगा है
उत्तर-पूर्व की सीमा पर ड्रैगन पैर पसार रहा,
अपनी उलटी चालों से वह कर सीमा विस्तार रहा,
ब्रहमपुत्र पर बाँध बनाने की वह घुड़की देता है,
अरुणाचल  और कश्मीर को नत्थी वीजा देता है.


 इन्हीं सभी गुत्थी में उलझा समाधान था सोच रहा,
तभी अचानक मेरे उपर निद्रा का अधिकार हुआ
उसी  रात सपने में मेरी बापू से मुलकात हुई,
मुझे अजीब लगा पहले तो वहां जो ऐसी बात हुई
होठों पर मुस्कान थी उनके अश्रु आँख से बहते थे ,
खड़े थे वह स्तब्ध भाव से मुख से कुछ न कहते  थे
मैंने पूछा बापू से यह क्या नौटंकी करते हो ,
एक समय में कैसे बापू तुम यह रोते हँसते हो 
 वह न बोले अपने मन में फिर मैंने यह सोचा है
क्या मैं मुन्नाभाई हूँ या यह केमिकल लोचा है
जब मैंने कुछ भी होने की आशा को था छोड़ दिया 
तभी अचानक बापू ने भी चुप्पी को था तोड़ दिया
बापू बोले ठहर पुत्र मैंने में अभी तुझे समझाता हूँ
अपनी मनोभावनाओं को अभी तुझे बतलाता   हूँ
भारत माता का दुःख मुझसे और नहीं देखा जाता 
लाख में चहुँ अश्रु रोकना लेकिन रोक नहीं पाता
देख के हत्या संस्कृति की मेरी फटती छाती है
हिंदी तिरस्कृत होती है इंग्लिश बोली जाती है
कृषक आत्महत्या करते हैं कॉल सेण्टर पनप रहे 
कृषि की योग्य भूमि पर देखो ऑफिस कैसे दमक रहे  
वहां चीन नत्थी वीजा की नीती पर है अड़ा हुआ
चाइनीस सामानों से बाज़ार यहाँ है पटा हुआ
लेकिन फिर भी हँसता हूँ में वत्स कहानी ऐसी है
युवाशक्ति है जो भारत में मुझ को चिंता कैसी है
ओबामा के माथे  पर भी चितन की रेखाएं हैं
अमेरिका तक जा पहुंची अब अपनी भी शाखाएं हिन्
बेंगलुरु का डर उनको हर समय सताता रहता है
या कहें पुराने गौरव की कुछ याद दिलाता रहता है
इन शब्दों  के साथ आज में विदा आपसे  लेता हूँ
लेकिन जाते-जाते फिर भी एक नसीहत देता हूँ
छोडो कब खामोश मिजाजी वर्ना कुचले जाओगे
आने वाली पीढ़ी को तुम कैसे मुँह दिखलाओगे
मन में हो जो विश्वास अटल तो कुछ भी नहीं असंभव है
है सोच नई है खून नया बदलाव कभी भी संभव है
सिस्टम को मत कोसो उठ के खुद ही  सिस्टम बन जाओ
उठो मानिंद सुनामी के और विश्वपटल पर छा जाओ
उठो युवा तुम राष्ट्र शक्ति हो तुमको आगे बढ़ना है
जब तक मंजिल न मिल जाये नहीं तुमे अब रुकना है
युग परिवर्तन की धारा का नेतृत्व युवा ही करते हैं 
तेरे जैसे युवा वत्स इतिहास दुबारा  लिखते हैं 
                                                                  काश........
मेरी यह कविता बहुत से लोगों को अतिआशावादी लग सकती है क्यूंकि यहाँ मैंने भारत और पाकिस्तान के मिलन की परिकल्पना की है, लेकिन ग्लोबलाइजेशन  के इस दौर में जहाँ पूरी दुनिया ऑरकुट और फेसबुक पे नज़र आती है मुझे भरोसा है एक दिन यह जरूर सच होगा........................
सरहदें टूटेंगी एक दिन दूरियां मिट जाएँगी
उस मेरे भाई को जिस दिन याद मेरी आएगी
दशकों से बिछड़े भाइयों का जब कभी होगा मिलन
आसमाँ झूमेगा उस दिन और जमीं मुस्काएगी
है अभी तक बोलती दिल्ली अमन की बोलियाँ
एक दिन आवाज़ यह लाहौर से भी आएगी।

मांग सूनी हो गयी यौवन  तड़पता रह गया,
जब कोई शौहर फ़ना सीमा पर जाके हो गया,
माँ का इकलौता छिना अंधे की लाठी छिन गयी,
और किसी मासूम के चेहरे की लाली छिन गयी,
था नहीं पैगाम यह हज़रत मोहम्मद का कभी,
ईमान के चेहरे पर कालिख दिल की पोती जाएगी


एक दिन आवाज़ यह लाहौर से भी आएगी.........
न सहेंगी पीढियां अब और खूंरेंजी सुनो ,
न कोई भाई कभी बेमौत मारा जायेगा,
सरहदें ज़रियाँ बनेगी अमन के पैगाम की ,
न कोई आतंकी सीमा में तुम्हारी आयेगा
मत करो चिंता अरे  हिन्दोस्ताँ के भाईओं ,
आज लश्कर की यहाँ होली जला दी जाएगी ।
एक दिन आवाज़ यह लाहौर से भी आएगी......... 

No comments:

Post a Comment